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Tuesday, November 1, 2016

अमाबस की अंधेरी में ज्यों चाँद निकल आया है






तुम्हारा साथ ही मुझको करता मजबूर जीने को 
तुम्हारे बिन अधूरे हम बिबश हैं  जहर पीने को 
तुम्हारा साथ पाकर के दिल ने ये ही  पाया है
अमाबस की अंधेरी में ज्यों चाँद निकल आया है 


मदन मोहन सक्सेना