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Tuesday, September 24, 2013

परायी दुनिया





परायी  दुनिया


अपना दिल जब ये पूछें की दिलकश क्यों नज़ारे हैं
परायी  लगती दुनिया में बह लगते क्यों हमारे हैं

ना उनसे तुम अलग रहना ,मैं कहता अपने दिल से हूँ
हम उनके बिन अधूरें है ,बह जीने के सहारे हैं

जीबन भर की सब खुशियाँ, उनके बिन अधूरी है
पाकर प्यार उनका हम ,उनसे सब कुछ हारे हैं

ना उनसे दूर हम जाएँ ,इनायत मेरे रब करना
आँखों के बह तारे है ,बह लगते हमको प्यारे हैं

पाते जब कभी उनको , तो  आ जाती बहारे हैं
मैं कहता अपने दिल से हूँ ,सो दिलकश यूँ नज़ारे हैं



मदन मोहन सक्सेना

4 comments:

  1. suder rachana per badhi.bahut badhiya rachana hai aapki

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  2. पाते जब कभी उनको , तो आ जाती बहारे हैं
    मैं कहता अपने दिल से हूँ ,सो दिलकश यूँ नज़ारे हैं

    ............बहुत ही बेहतरीन और सार्थक भाव लिए रचना.

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  3. जीबन भर की सब खुशियाँ, उनके बिन अधूरी है
    पाकर प्यार उनका हम ,उनसे सब कुछ हारे हैं

    ना उनसे दूर हम जाएँ ,इनायत मेरे रब करना
    आँखों के बह तारे है ,बह लगते हमको प्यारे हैं
    खूबसूरत पंक्तियाँ ! शानदार अलफ़ाज़

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