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Sunday, September 1, 2013

खुशबुओं की बस्ती




खुशबुओं  की   बस्ती

खुशबुओं  की   बस्ती में  रहता  प्यार  मेरा  है
आज प्यारे प्यारे सपनो ने आकर के मुझको घेरा है
उनकी सूरत का आँखों में हर पल हुआ यूँ बसेरा है
अब काली काली रातो में मुझको दीखता नहीं अँधेरा है

जब जब देखा हमने दिल को ,ये लगता नहीं मेरा है
प्यार पाया जब से उनका हमने ,लगता हर पल ही सुनहरा है
प्यार तो है  सबसे परे ,ना उसका कोई चेहरा है
रहमते खुदा की जिस पर सर उसके बंधे सेहरा है

प्यार ने तो जीबन में ,हर पल खुशियों को बिखेरा है
ना जाने ये मदन ,फिर क्यों लगे प्यार पे  पहरा है

काब्य प्रस्तुति : 
मदन मोहन सक्सेना

4 comments:

  1. क्या बात है भाई मदन जी-
    बढ़िया -
    आभार-

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  2. जब जब देखा हमने दिल को ,ये लगता नहीं मेरा है
    प्यार पाया जब से उनका हमने ,लगता हर पल ही सुनहरा है
    प्यार तो है सबसे परे ,ना उसका कोई चेहरा है
    रहमते खुदा की जिस पर सर उसके बंधे सेहरा है

    अतिसुन्दर सार्थक सौदेश्य प्रस्तुति सन्देश देती प्रेम

    में बड़ी ताकत है।

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  3. प्यार ने तो जीबन में ,हर पल खुशियों को बिखेरा है

    बहुत सुन्दर रचना

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  4. खुशबुओं की बस्ती में रहता प्यार मेरा है
    आज प्यारे प्यारे सपनो ने आकर के मुझको घेरा है
    उनकी सूरत का आँखों में हर पल हुआ यूँ बसेरा है
    अब काली काली रातो में मुझको दीखता नहीं अँधेरा है

    वाह मदन भाई बहुत सुंदर

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